दिल्ली में कोरोना के कारण हालात गंभीर,अस्पतालों का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार,दिल्ली सरकार सिर्फ टीवी सरकार बनी.

कोरोना भारत में अब बहुत तेज गति से अपने पाँव पसार रहा है,मुंबई और दिल्ली दोनों महानगरों में स्थिति विस्फोटक होती जा रही है,दिल्ली की सरकार बड़े बड़े दावे जरूर कर रही है,लेकिन स्थिति इन दावों के बिल्कुल विपरीत है,पिछले 2 से 3 दिनों के कोरोना घटनाक्रम को देखे तो आने वाला वक़्त दिल्ली के लिए बहुत ही डरावना है,क्योकी राजधानी में 25 हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं.और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था भी दबाव में आ गई है .


  केजरीवाल सरकार कोरोना से लड़ने के दावे तो बड़े बड़े जरूर कर रही है .लेकिन ये जमीनी हकीकत से बहुत परे दिखायी दे रहे है,दिल्ली सरकार ने  हेल्प लाइन जारी किये हुए है लेकिन शिकायते आ रही है की ये हेल्पलाइन नंबर हमेशा व्यस्त बताता है,लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने ऐप भी लॉन्च किया है, लेकिन ऍप में बेड खाली बताने के बावजुद मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है,अस्पतालों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण मरीजों की मौत हो रही है,जो केजरीवाल सरकार के दावों की पोल खोल रही है.


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अमित कुमार 

 अमित कुमार केस-

थोड़े दिन पहले दिल्ली पुलिस के जवान अमित कुमार जो मात्र 31 साल के थे,अपनी ड्यूटी करते कोरोना पॉजिटिव हो गए,उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। हल्का बुखार होने पर अमित को दवाई दी और फिर बुखार ठीक हो गया लेकिन कुछ देर बाद फिर से तबीयत बिगड़ गई। ऐसे में दिल्ली की कोरोना हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया लेकिन वहां से जवाब मिला कि वे केवल टेस्ट कर सकते हैं। 

कुछ ने जगह न होने की बात कही तो कुछ ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही दाखिल किया जाएगा। वहीं,अमित की तबीयत लगातार बिगड़ती रही और बुधवार सुबह उसने दम तोड़ दिया,8 घंटे तक अमित के साथी करीब आधा दर्जन अस्पतालों में अमित को दाखिल कर लेने की गुहार लगाते उसे कार में लिए भटकते रहे लेकिन सभी ने इनकार कर दिया, और अंत में अमित कुमार की मौत बदइंतजामी के कारण हो गयी। 


  रवि अग्रवाल केस-

  गुरुवार रात शाहदरा के रवि अग्रवाल को सांस की तकलीफ के बाद जीटीबी अस्पताल लाया गया,लेकिन जीटीबी अस्पताल ने उन्हें बाहर ही तड़पते हुए छोड़ दिया.परिजनों ने अस्पताल पर आरोप लगाया है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने पहले टेस्ट रिपोर्ट दिखाने पर ही एडमिट करने की बात कहीं .जानकारी के मुताबिक, परिजन भर्ती कराने को लेकर जगह-जगह फोन घुमाते रहे जिसके बाद उन्हें काफी देर बाद अस्पताल में भर्ती किया गया,लेकिन भर्ती होने के कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई

जीटीबी अस्पताल का कहना है कि पेशेंट की हालत बेहद गंभीर थी उन्हें तुरंत दाखिल किया गया .

  

  दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने ट्वीट किया कि आज कोरोना से एक और मौत हो गई.शाहदरा के रवि अग्रवाल आज 5 घंटे तक स्ट्रैचर पर तड़पते रहे और अंत में उनकी जान चली गई, लेकिन  उन्हें बेड नहीं मिला.उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि बार-बार ऐसी खबरों का आना दिल्ली सरकार के लिए बड़े शर्म की बात है,लोगों की जान की कोई कीमत नहीं समझ रहे अरविंद केजरीवाल.


  धर्मेंद्र भारद्वाज की माता जी का केस-


धर्मेंद्र भारद्वाज ने 19 मई को अपनी मां को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत होने के बाद पूर्वी दिल्ली के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया.जिसके बाद 21 मई को टेस्ट में मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया गया था.
22 मई की सुबह अस्पताल प्रशासन ने धर्मेंद्र भारद्वाज से कहा कि आपकी मां को वेंटिलेटर की जरूरत है.हमको वेंटिलेटर नहीं मिल पा रहा है,आप खुद कहीं से इंतजाम कर लीजिए.इसके बाद धर्मेंद्र भारद्वाज ने 22 मई दोपहर 2:15बजे एक वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने अपनी बेबसी बताते हुए कहा कि मैंने कई अस्पतालों में जाकर देख लिया हेल्पलाइन नंबर पर भी फोन लगा लिया,लेकिन मुझे वेंटिलेटर नहीं मिल पा रहा है.बाद में जब वीडियो वायरल हुआ तो 23 मई की शाम को अस्पताल ने धर्मेंद्र भारद्वाज को बुलाकर कहा कि वो चिंता ना करें,उनकी मां का इलाज यहीं होगा.जिसके बाद अस्पताल में धर्मेंद्र भारद्वाज की मां को वेंटिलेटर लगाया गया.इसके बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका.31मई की शाम को धर्मेंद्र भारद्वाज की मां का अस्पताल में निधन हो गया.अब धर्मेंद्र भारद्वाज भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं इस वजह से वो होम आइसोलेशन में चले गए हैं.

25 मई को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस संबंध में निजी अस्पताल को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया.उन्होंने अस्पताल प्रशासन से पूछा कि उनका लाइसेंस क्यों ना रद्द किया जाए.मुख्यमंत्री ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल का यह व्यवहार गलत था.इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

 दिल्ली सरकार के ऐप में बेड लेकिन हकीकत में बेड नहीं- 

एक अन्य केस में 2-3 दिनों से मरीज को बुखार था.बुधवार रात को जितने भी इमरजेंसी नंबर हैं सब पर संपर्क किया गया,लेकिन सबसे पहले उन्होंने ये पूछा कि आपका मरीज कोरोना पॉजिटिव होना चाहिए.


 मरीज के करीबी अभिषेक जैन ने कहा कि गुरुवार सुबह उन्हें (मरीज)सांस लेने में दिक्कत होने पर,शालीमार बाग के फोर्टिस हॉस्पिटल ले जाया गया.वहां पर उन्हें ऑक्सीजन दिया गया.इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने कहा कि आप अपने मरीज को वापस ले जाइए.हमारे पास कोई बेड नहीं है. हमने उनसे कहा कि आप कोरोना का टेस्ट तो कर लीजिए.अस्पताल प्रशासन ने कहा कि हम मदद नहीं कर सकते.


मृतक के परिजन ने बताया कि उन्होंने सीएम केजरीवाल और आईसीएमआर से भी संपर्क किया,लेकिन कोई भी मदद को तैयार नहीं हुआ.2से 3 घंटे के बाद अस्पताल हम पर मरीज को वापस लेने जाने का दबाव बनाने लगा. हमने एंबुलेंस के लिए मदद मांगी तो अस्पताल ने कहा कि मरीज बिना एंबुलेंस के भी जाने लायक है. जब हमने दबाव डाला तो उन्होंने कहा कि हमारे एंबुलेंस काम नहीं कर रहे हैं. अस्पताल ने कहा कि हमारे कोविड टेस्टिंग सेंटर दो दिन से बंद हैं.मृतक के परिजन ने कहा कि इसके बाद मुझे मॉडल टाउन में एक अस्पताल मिला. लेकिन अस्पताल प्रशासन का कहना था कि उनके पास पीपीई किट नहीं है. मैंने मदद मांगी, लेकिन मुझे कोई मदद नहीं मिली. इस बीच उन्होंने स्ट्रैचर से मरीज को ट्रांसफर किया,लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो चुकी थी.


 हम दिल्ली सरकार का ऐप देख रहे थे तो सबमें बेड दिखा रहा था.लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी बया कर  रही थी,अभिषेक जैन ने कहा कि जब हम अंतिम संस्कार के लिए गए तो हमें कहा गया कि दो दिन का समय लगेगा. कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा.सिर्फ मजाक बनाया जा रहा है.

 

‘हम डॉक्टर के पैर छूने की हद तक भी गए,रोगी को देखने के लिए हाथ जोड़कर भीख मांगते रहे-

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के एक 67 वर्षीय कोरोना मरीज को दिल्ली के अस्पताल की लापरवाही का शिकार होना पड़ा.मंगलवार को उनकी बेटी अमरप्रीत,जो गुरुग्राम में रहती हैं, ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ट्वीट कर अपने कोरोना पॉजिटिव पिता के लिए मदद मांगी,लेकिन हेल्पलाइन से किसी तरह का जवाब नहीं मिला.


 31 मई को मरीज को  गंगा राम अस्पताल ले जाया जाता है और एक्सरे करने के बाद छाती में संक्रमण बताया जाता है,कोविड टेस्टिंग के लिए ब्लड सैंपल भी लिया जाता है और परिणाम आने तक अस्पताल नहीं आने के लिए कहां जाता है.

परिवार जनो द्वारा अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं, कि इस प्रक्रिया के लिए 3 घंटों का इंतजार करवाया गया परिजनो का कहना है की उस दिन भारी बारिश भी हो रही थी कि मरीज समेत हम सभी काफी भीग गए थे .

1 जून को रिपोर्ट आने के बाद परिवार वालो ने मैक्स,अपोलो,एम्स,सफदरजंग के अलावा कई अन्य जगहों पर कोरोना पॉजिटिव मरीज को भर्ती कराने की तलाश की लेकिन कहीं कोई जगह नहीं मिली.



इस बीच पीड़ित परिवार ने महामारी से निपटने के लिए दिए गए हेल्पलाइन नंबरों को डायल करने का भी प्रयास किया,लेकिन यह हमेशा की तरह व्यस्त ही रहा.


3 जून को जब बुजुर्ग मरीज का तापमान बढ़कर 102 डिग्री तक पहुंच गया तो परिवार के सदस्यों ने उन्हें अस्पताल ले जाने और प्रोफेशनल प्रीस्क्रीप्शन के जरिए आपातकालीन लाइन में खड़े होने का फैसला किया.दवा देने की वजह से 4 जून की सुबह तापमान 102 डिग्री से गिरकर 98 डिग्री तक नीचे आ गया.


लगातार संघर्ष के बाद परिवार के सदस्यों ने दिल्ली हेल्पलाइन की सलाह के बाद एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया, लेकिन एलएनजेपी में डॉक्टरों ने यह कहते हुए उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया कि मरीज गंगा राम अस्पताल से संबंधित है.इस दौरान मरीज कार में ही बैठने को मजबूर थे.

गुरुवार को अमरप्रीत ने फिर से ट्विटर पर अपने पिता के लिए मदद की गुहार लगाई.उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरे पिता को तेज बुखार है.हमें उन्हें अस्पताल में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है.मैं LNJP के बाहर खड़ी हूं और वे उन्हें अंदर नहीं ले जा रहे हैं.’


इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया की बाढ़ सी आ गई और लोग दिल्ली सरकार के कोरोना वायरस से लड़ने के उसके सारे दावों पर सवाल उठाने लगे.


परिवार वाले बताते हैं कि अस्पताल की ओर से भर्ती करने से इनकार के बाद जैसे ही हम वापस अपनी कार में पहुंचे तो  दिल का दौरा पड़ने से वो बेहोश हो गए.हमने उनका इलाज करने के लिए डॉक्टरों से बहुत विनती की, लेकिन वे बस यही कहते रहे कि मरीज गंगा राम अस्पताल का है.

उन्होंने कहा, ‘हम डॉक्टर के पैर छूने की हद तक भी गए,रोगी को देखने के लिए हाथ जोड़कर भीख मांगते रहे. डॉक्टर 10 मिनट के बाद वापस लौटा और मरीज को ऑक्सीजन लगा दिया.लेकिन 15 मिनट बाद ही मरीज की मौत हो गई.

लेकिन मरीज की मौत के साथ इस परिवार के लिए दुखों का अंत नहीं हो गया.अब उन्होंने उनके अंतिम संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना होगा.पहले शव को मोर्चरी में ले जाया जाएगा और अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे 3-4शवों के बाद उनका नंबर आएगा.

इतना ही नहीं एक कोरोना पॉजिटिव की मृत्यु के बाद भी पुरा परिवार कोविड19की जांच करवाने के लिए संघर्ष कर रहा है,लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान तक नहीं दे रहा है। 

देश की राजधानी के हालात बहुत बिगड़ते जा रहे है,सरकार के साथ साथ हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है, की इस लड़ाई में हम अपनी भागीदारिता पुरी जिम्मेदारी से निभाए .


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