चीन की सीमा पर दादागिरी का जवाब,भारत में दूरसंचार क्षेत्र से चीन को बाहर का रास्ता दिखाने की शुरुवात .


चीन की जिद और सीमा पर तनाव के कारण उत्पन्न हुए हालात के परिणाम स्वरुप दोनों देशो को अपने सैनिको की जान गवानी पड़ी,भारत के 20 सैनिक वीर गति को प्राप्त हुए,जिससे पुरा देश ग़ुस्से से उबल पड़ा,और राजनैतिक,आर्थिक और युद्ध मोर्चे पर चीन को सबक सीखाने की मांग करने लगा.
सरकार ने भी इन 20सैनिको की शहादत को बहुत गंभीरता से लिया है।  

    चीन की सीमा पर दादागिरी का जवाब,भारत में दूरसंचार क्षेत्र से चीन को बाहर का रास्ता दिखाने की शुरुवात .


संचार मंत्रालय ने BSNL और MTNL से कहा गया है कि वे अपने टेंडर में बदलाव करें,इसका असर  चीनी कंपनी Huawei और ZTE के भारत में कारोबार पर बहुत गहरा पड़ेगा।

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 देश के 5G डिप्‍लॉयमेंट्स से ये दोनों कंपनियां प्रतिबंधित कर दी जाएगी.

सरकारी टेलिकॉम कंपनियों से किसी भी चीनी कंपनी के इक्विपमेंट्स का इस्‍तेमाल न करने को कहा है। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) के टेंडर को कैंसिल कर दिया गया है। साथ ही,प्राइवेट मोबाइल फोन ऑपरेटर्स के लिए भी Huawei और ZTE जैसे चीनी ब्रैंड्स से दूर रहने का नियम बनाया जा सकता है

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 भारतीय टेलिकॉम इक्विपमेंट का एनुअल मार्किट 12,000 करोड़ रुपये है। इसमें से एक-चौथाई(25 %)पर चीन का कब्‍जा है।

 बाकी में स्‍वीडन की एरिक्‍सन,फिनलैंड की नोकिया और साउथ कोरिया की सैमसंग शामिल है।

  वर्तमान में चाइनीज कंपनी ZTE का BSNL सबसे बड़ा कस्टमर है। वह इसे छह सर्विस एरिया में सपॉर्ट करता है .
प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियां पहले से ही चीन पर निर्भरता घटा रही हैं। वर्तमान में ZTE भारती एयरटेल के लिए 2 सर्कल में और वोडाफोन आइडिया के लिए पांच सर्कल में काम करता है।
 इस फील्ड के लोगों का कहना है कि अगर भारतीय कंपनियां चीन छोड़कर दूसरे देशों से आयात करती हैं तो लागत 15 फीसदी तक बढ़ जाएगी। 
 इस प्रकार चीन को करीब 3 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान है

ऐसा भी शक  किया जाता है की इन  कंपनियों में चीनी सेना का भी हिस्‍सा है। Huawei पर लंबे समय से पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) के इशारे पर काम करने का शक रहा है।


 कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने #BoycottChineseProducts की मांग की है।

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इससे पहले CAIT ने सरकार से चीनी कम्पनियों को दिए गए ठेकों को तुरंत रद्द करने और भारतीय स्टार्टअप में चीनी कंपनियों द्वारा निवेश को वापस करने के नियमों को बनाने जैसे कुछ तत्काल कदम उठाने का सरकार से आग्रह किया था .
कैट ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों और भारत के प्रति चीन के लगातार रवैये के मद्देनजर, भारतीय व्यापारियों ने संकल्प लिया है चीनी आयात को कम करके चीन को एक बड़ा सबक सिखाएं। उन्होंने कहा कि भले ही व्यापारियों का व्यापार चीन से आयात हो रहा है, लेकिन फिर भी उनके लिए राष्ट्रीय हित से पहले कुछ नहीं होगा.


















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