विदेशी धरती पर विजय माल्या को करारी शिकस्त देने वाले CBI के तेजतर्रार ऑफिसर जिन्हे CBI के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है सुमन कुमार.

विदेशी धरती पर विजय माल्या को करारी शिकस्त देने वाले CBI के तेजतर्रार ऑफिसर जिन्हे CBI के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक से भी सम्मानित  किया  जा चुका है सुमन कुमार.



लिकर किंग के नाम से मशहूर विजय माल्या को गुरूवार को उस वक़्त तगड़ा झटका लगा जब ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत ने उसकी प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर सुनवाई से इंकार कर दिया। इसी केसाथ ही माल्या की भारत वापसी का रास्ता भी साफ हो गया.

विदेशी धरती पर विजय माल्या को करारी शिकस्त देने वाले CBI के तेजतर्रार ऑफिसर जिन्हे CBI के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक से भी सम्मानित  किया  जा चुका है सुमन कुमार.

विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रकिर्या के लिए 28 दिन का वक़्त रहेगा। अब माल्या यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ईसीएचआर)अदालत में अपनी अर्ज़ी दे सकते हैं क्योंकि तकनीकी रूप से ब्रिटेन अभी भी यूरोपीय संघ में शामिल है.लेकिन इस बात की कम संभावना है कि ये अदालत ब्रितानी सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ जाकर अपना फ़ैसला सुनाए.और  इस बात की संभावना भी कम ही नजर आती है की माल्या ईसीएचआर में अपनी अर्जी दे। 

भारत ने विजय माल्या को भगौड़ा घोषित कर रखा और उस पर बैंको के साथ धोखाधड़ी का केस है.

विदेशी धरती पर विजय माल्या को करारी शिकस्त देने वाले CBI के तेजतर्रार ऑफिसर जिन्हे CBI के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक से भी सम्मानित  किया  जा चुका है सुमन कुमार.

    जाने कैसे विजय माल्या सीबीआई के शिकंजे में फ़सा 

 सीबीआई के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक राकेश अस्थाना ने विशेष जांच दल के प्रमुख के रूप में मामले की बागडोर संभाली और ये केस अक्टूबर 2015 में सीबीआई अधिकारी सुमन कुमार को मुंबई के बैंकिंग धोखाधड़ी तथा प्रतिभूति प्रकोष्ठ के डीएसपी के तौर पर जांच के लिए सौंपा । जिस पर सुमन कुमार जी ने 3 साल तक इस मामले में बहुत मेहनत की नतीजा विजय माल्या अंतिम लड़ाई भी हार गया  सीबीआई की टीम ने यहाँ ये विशेष ध्यान रखा की मामले की एक भी सुनवाई छूटने ना पाए और क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस के साथ  बेहतर तालमेल रखा. 

 सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के सक्रिय समर्थन से क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस यह मुकदमा लड़ रही थी.   

इस केस में सीबीआई को शुरुवात में बड़ी मुश्किलों को सामना करना पड़ा.क्योकी गंभीर आरोपों के बावजूद कर्ज देने वाले बैंकों ने विजय माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज नहीं कराया। 

सीबीआई ने अपने सूत्रों से जानकारी प्राप्त कर कथित कर्ज धोखाधड़ी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और आगे की कार्यवाही करने का फैसला लिया।  

सुमन कुमार  के बारे में 

 सुमन कुमार फिलहाल सीबीआई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हैं।सुमन कुमार तेईस साल की आयु में उप-निरीक्षक के तौर पर सीबीआई में भर्ती हुए थे कुमार का सफेदपोश अपराधों की जांच में शानदार रिकॉर्ड रहा है। 

 साल 2002 के सीबीआई के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी के रूप में में उन्हें स्वर्ण पदक से नवाजा गया था।ये स्वर्ण पदक तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने उन्हें दिया था  

सुमन कुमार(55)को 2008 में सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक,2013 में उत्कृष्ट जांचकर्ता और 2015में राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है.  

  विजय माल्या केस बहुत मुश्किल केसो में से एक था,और CBI के लिए चुनौती भरा क्योकी विजय माल्या ब्रिटेन भागने में कामयाब हो गया था और ये सीबीआई की इज्जत पर बट्टा लगाने वाली  बात थी और दुसरा यूरोप, विशेष रूप से ब्रिटेन में प्रत्यर्पण के मामलों में भारत का रिकॉर्ड बहुत बुरा रहा है.

 सुमन कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती माल्या के खिलाफ ऐसे सबूत जुटाना थी जो ब्रिटेन के कानून के तहत दंडनीय अपराध हों.इसलिए माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी का एक ठोस केस बना भारत में चार्जशीट दायर की गई.

उसके बाद 3 साल लगातार ब्रिटेन की अदालतों में एक एक पॉइंट को  ठोस तर्कों के साथ रखा गया,जिसका नतीजा  आज ये है की विजय माल्या अतिशीघ्र भारतीय न्याय पालिका के कब्जे में होगा। 

सीबीआई की इस केस में शानदार जीत से देश को चुना लगा कर भागने वालो को  एक सबक भी मिलेगा। 



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