Friday, March 13, 2026
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EDITOR

कोरोना की जांच में कई देशो द्वारा कुतो का इस्तेमाल,जांच के 90 % से भी ज्यादा सटीक होने का दावा,भारतीय सेना भी कर रही है इस्तेमाल।

                                                                                                                                    

 कुत्ते कर रहे है कोरोना की सबसे सही और सटिक जांच-शोध में दावा

संसार में इंसानो का सबसे वफादार साथी कुत्तो को माना जाता है,और ये बात कई मौको पर कुत्ते साबित भी कर चुके है.

 आज कोरोना के आपातकाल में जब इंसान बेबस और लाचार नजर आ रहा है, रोज नयी नयी खोज इस मुसीबत से छूटकारा पाने के लिए कर रहा है.

ऐसे में एक खोज की कुत्ते कोरोना सक्रमण की पहचान मात्र सुंघ कर1 मिनट में कर सकता है और उस जांच(test) की सटीकता 90 %से भी ज्यादा होती है। ये खबर मानव जाति के लिए एक राहत भरी खबर है। 



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कई शोधो और रिसर्च ने पाया है की कुत्ते एंटीजन जांच से ज्यादा सटीक परिणाम दे रहे है। फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि सूंघने की शक्ति के लिए प्रशिक्षित किए गए कुत्ते, इंसानी पसीने की महक से उनमें कोरोना संक्रमण का सटीक अनुमान लगा सकते हैं। 

 ये कुत्ते कोविड(COVID) स्क्रीनिंग का काम एक मिनट में करने में सक्षम हैं जबकि रैपिड एंटीजन जांच से संक्रमण का पता लगाने में कम से कम 15 मिनट लगते हैं।

 पेरिस के नेशनल वेटरनरी स्कूल ऑफ एल्फोर्ड के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि कुत्ते अपनी सूंघने की क्षमता के बल पर इंसानों में कोरोना संक्रमण का 97 प्रतिशत तक सटीक अंदाजा दे सकता है। इंसानी शरीर कोरोना संक्रमण के खिलाफ जो प्रतिक्रिया देता है, वह उसके पसीने और सलाइवा में भी प्रदर्शित होती है जिससे कुत्ते सूंघकर पहचान सकते हैं।

भारतीय(indian )सेना भी कोरोना जांच में कर रही है कुतो का इस्तेमाल-

भारतीय सेना भी सूंघकर कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए दो कुत्तों को ट्रेनिंग दे चुकी है आठ और कुत्तों को ट्रेनिंग दी जा रही है.जल्दी ही भारतीय सेना के पास कोरोना की जांच करने वाले 10 कुत्ते हो जाएंगे. 

भारतीय सेना द्वारा ट्रैंड कुत्ता जो कोरोना की जांच करता है👈क्लिक करे 

कैस्पर (Cocker Spaniel) और जया (Chippiparai) ,इनमे कैस्पर की उम्र दो साल व् जया की उम्र एक साल है,इन दोनों ने अब तक हजारो की संख्या में सही व् सटीक निर्णय के साथ जांच की है 

भारतीय सेना की ओर से प्रशिक्षित किए गए कुत्ते कुछ ही सेकंड में सैंपल में कोरोना वायरस की पहचान कर लेते हैं. सैंपल जैसे कि यूरिन या पसीने को सूंघने के बाद  कुत्ते अपने इंस्ट्रक्टर को सिग्नल भेजते हैं. और अगर सेम्पल पॉजिटिव होता है तो कुत्ते उसके पास ही बैठ जाते है,

आमतौर पर कुतो की ट्रेनिंग 36 सप्ताह की होती है लेकिन जरूरत के अनुसार अब इन्हे 16 सप्ताह में भी ट्रैंड किया जा रहा है

भारतीय सेना के चंडीगढ़ के कैंप में कोरोना जांच के लिए कुत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा जहां से सैनिकों को लद्दाख और कश्मीर भेजा जाता है.

 अब तक कुत्तों को किसी विस्फोटक या ड्रग्स का पता लगाने के लिए ही प्रशिक्षित किया जाता रहा है पर कोरोना काल में ऐसा पहली बार हुआ जब उनकी सूंघने की क्षमता का उपयोग इस वायरल रोग का पता लगाने के लिए किया जा रहा है।

 कुत्तों की सूंघने की क्षमता को लेकर ही एक अन्य शोध पेनेसोल्वेनिया स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन डॉग सेंटर भी कर रहा है,जिसमें यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या कुत्ते टीका लगवा चुके लोगों और संक्रमित लोगों के बीच अंतर कर पाएंगे। अगर ऐसा संभव हुआ तो ऐसे प्रशिक्षण प्राप्त कुत्तों के कारण कोरोना से लड़ाई और आसान हो जाएगी। 

एक दिन में 300 कोरोना जांचें कर सकता एक कुत्ता: डब्लूएचओ

एक अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स ने पाया है कि एक खोजी कुत्ता एक दिन में 300 इंसानों की कोविड जांच  कर सकता है और इसके लिए उस व्यक्ति से सीधे संपर्क में आने की जरूरत भी नहीं होगी। 

जिस तरह एंटीजन जांच करने के लिए नाक से स्वाब नमूने लेने की आवश्यकता होती है,इसमें इस  तरह के संपर्क की जरूरत नहीं रहती है। 

बेहद कम समय व कम संसाधन में कोरोना जांच हो जाएगी। इस अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स का समन्वय विश्व स्वास्थ्य संगठन ने किया जो कि खोजी कुत्तों के कोविड स्क्रीनिंग में उपयोग को लेकर बनायी गई।

फ़िनलैंड एयरपोर्ट(AirPort ) पर तैनाती-

फिनलैंड के हेलसिंकी-वांता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संक्रमित यात्रियों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों को तैनात किया जा चुका है। 

 इंसानो से एक हजार गुना ज्यादा सूंघने की क्षमता-

कुत्तों में सूंघने की क्षमता इंसानों के मुकाबले एक हजार गुना ज्यादा होती है, कुत्तों की इस शक्ति का उपयोग कैंसर,मलेरियाऔर डायबीटिज की पहचान के लिए भी कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता रहा है.कई अन्य देशों में भी खोजी कुत्तों को कोरोना संक्रमण से जुड़ी महक के विषय में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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